इक परी के साथ में हूँ इक परी को छोड़ कर
शा'इरी को जी रहा हूँ ज़िंदगी को छोड़ कर
ये मेरा दावा है उस को आज़मा के देखिए
आप कुछ भी कर सकेंगे आशिक़ी को छोड़ कर
इस बग़ीचे में हज़ारों फूल हैं श्रीमान जी
आप के ही हैं ये सब बस उस कली को छोड़ कर
पूछते हैं लोग मुझ से काम क्या कर लेते हो
काम कुछ भी है नहीं जी शा'इरी को छोड़ कर
— Murari Mandal















