pyaar ka aaj chalan dosto dushwaar hai kyuuñ | प्यार का आज चलन दोस्तो दुश्वार है क्यूँ

  - Qadir Siddiqi
प्यारकाआजचलनदोस्तोदुश्वारहैक्यूँ
आजइंसानख़ुदइंसानसेबेज़ारहैक्यूँ
आजकेदौरनेयेकौनसीकरवटलीहै
आजकेदौरमेंमासूमगुनहगारहैक्यूँ
बे-गुनाहोंकालहूशहरमेंअर्ज़ांहीसही
आसमाँपरभीवहीरंगनुमूदारहैक्यूँ
मैंतोमरजानेकोतय्यारहूँदुश्मनकेलिए
मेरादुश्मनभीमगरमरनेकोतय्यारहैक्यूँ
क्यातिरेकूचेहीकीदेनतरहदारीहै
तेरेकूचेसेजोगुज़रावोतरह-दारहैक्यूँ
पहलेबरसोंमेंभीसुननेकोमिलताथायेनाम
आजहोंटोंपेहरइककेरसन-ओ-दारहैक्यूँ
क्याहमइसदौरकोशुबहातकाइकदौरकहें
शकमेंडूबाहुआहरशख़्सकाकिरदारहैक्यूँ
क्यूँख़ुलूसऔरसदाक़तसेनहींकुछहासिल
मक्रहीमक्रज़मानेकोसज़ा-वारहैक्यूँ
तेरेमयख़ानेकेफ़ैज़ान-ओ-करमसबतस्लीम
तेरेमयख़ानेकाहरजामनिगूँ-सारहैक्यूँ
कलतकउसशोख़कीयादोंपेथाजीनेकामदार
आजउसशोख़कीहरयादगिराँ-बारहैक्यूँ
गोशा-ए-दिलमेंभीबुत-ख़ानेहुआकरतेहैं
'क़ादिर'इसबातसेअबआपकोइंकारहैक्यूँ
  - Qadir Siddiqi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy

Nafrat Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Qadir Siddiqi

As you were reading Shayari by Qadir Siddiqi

Similar Writers

our suggestion based on Qadir Siddiqi

Similar Moods

As you were reading Nafrat Shayari Shayari