hisse mein mere hain yahi jaageer bas | हिस्सें में मेरे हैं यही जागीर बस

  - Rachit Sonkar

हिस्सें में मेरे हैं यही जागीर बस
मत माँगना तुम मुझसे मेरी हीर बस

मेरा कोई झगड़ा नहीं तुम से मियाँ
छूना नहीं उसकी कोई तस्वीर बस

ख़ुशियाँ सभी अपनी तुझी पर वार दूँ
तू तोड़ दे नफ़रत की ये ज़ंजीर बस

असबाब कितने हैं यहाँ रक्खे हुए
पर चाहिए मुझको तिरी तस्वीर बस

मैं चूम लूँ तेरे लबों की ये महक
दे दे ख़ुदा मुझको भी ये तकदीर बस

हैं ख़ूबसूरत और नज़ारे भी मगर
पहले तो देखेंगे तेरी तस्वीर बस

स्वीकार हैं मुझको तो मरना भी अगर
तू मार दे हाथों से अपने तीर बस

  - Rachit Sonkar

Freedom Shayari

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