ho sake to tum ye rukkar dekh lo | हो सके तो तुम ये रुककर देख लो

  - Rachit Sonkar

हो सके तो तुम ये रुककर देख लो
चल रहा है दिल पे ख़ंजर देख लो

इक कली भी आस की बाक़ी नहीं
कर दिया है दिल को बंजर देख लो

तुम गये हो जब से मुझको छोड़ कर
हो गया मैं तब से पत्थर देख लो

इक हमारी जान लेने के लिए
आए हैं वो ले के लश्कर देख लो

बस करो ये आँख कहती है मगर
दिल ये कहता उनको दिनभर देख लो

सिर्फ़ मुझको दोष देते रहते हो
झाँक के अपने भी अंदर देख लो

तुमने ही फैलाया है सब रायता
कुछ हमारे भी हैं मुखबर देख लो

लग रहा है उसकी शादी हो गई
सज रहा है एक बिस्तर देख लो

थोड़ी क्या तारीफ़ कर दी यार ने
तो महारानी के तेवर देख लो

आपकी अर्ज़ी कहाँ रक्खूँ 'रचित'
भर गया है दिल का दफ़्तर देख लो

  - Rachit Sonkar

Dosti Shayari

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