मेरी आँखों का पर्दा जा रहा है
कोई रस्ता निकलता आ रहा है
रहूँ आख़िर मैं अब ख़ामोश कैसे
मेरे अंदर कोई चिल्ला रहा है
ग़मों का बोझ है या और ही कुछ
तेरा चेहरा बदलता जा रहा है
तेरी बातें, तेरी बातों का जादू
ये लड़का इन में फँसता जा रहा है
— Raghav Ramkaran















