नज़र से दिल में बिठाया बिठा के भूल गया
मुझे दिवाना बनाया बना के भूल गया
मैं साथ तेरा निभाऊँगा सात जन्मों तक
हसीं ये ख़्वाब दिखाया दिखा के भूल गया
वो आज भी न रहा अपने वादे पे क़ायम
हमें मिलन को बुलाया बुला के भूल गया
कहीं भी उस की दु'आओं में हम नहीं शामिल
दुआ में हाथ उठाया उठा के भूल गया
मैं लड़खड़ाता रहा एक उम्र तक यूँ ही
नज़र का जाम पिलाया पिला के भूल गया
हुई जो मुझ से ख़ता ऐ ख़ुदा बता मुझ को
मुझे बशर जो बनाया बना के भूल गया
कभी किसी पे जताया मलक न एहसाँ को
कि जिस का साथ निभाया निभा के भूल गया
— Ram Singar Malak















