tumhein mera kisi tarah se jaan intizaar ho | तुम्हें मिरा किसी तरह से जान इंतिज़ार हो

  - Azmi Saud

तुम्हें मिरा किसी तरह से जान इंतिज़ार हो
तू तार तार हो अगर तो फिर ये बार बार हो

हम इस तरह से हारे हैं कि लोग ख़ौफ़ खाते हैं
हमारे यार थे कभी हमारा कौन यार हो

हमारे लोग ही तबाह कर दिए हैं नाव को
हमें तो तैरना न आए तुम नदी के पार हो

हमारे साथ कोई राज़ी ही नहीं सफ़र को अब
हमारे पास कार हो अगर तो ख़ाक कार हो

हमें लगा था क़ैदखाना ये नहीं हो सकता है
मगर ये झूट भी तो है नहीं कि तुम फ़रार हो

हमारे ख़्वाब में है इक अलग जहाँ अजब जहाँ
जो ज़िंदा हो मरा करे तो मुर्दा जानदार हो

  - Azmi Saud

Rahbar Shayari

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