Safar
Safar
Ghazal

बैठी हूँ इंतिज़ार में बनठन के सामने

आएँगे साजना अभी आँगन के सामने

साया बनाऊँ हूँ मैं तख़य्युल में यार का
परछाई रक़्स करती है धड़कन के सामने

मेरी बड़ी है प्यास बताऊँगी भूक को
रोऊँगी फूट फूट के सौकन के सामने

ले के फिरूँ हूँ यार की सूरत गली गली
मोहन ही आ गए मेरे मोहन के सामने

पाज़ेब चूड़ियाँ मेरे किस काम की रहीं
नंगे बदन ही जाना है साजन के सामने

अपने अकेलेपन का करूँ हूँ मैं यूँ इलाज
दर्पन है पीछे और मैं दर्पन के सामने

— Safar

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