Safar
Safar
Ghazal

इतनी ख़ुशियाँ भर दी तुम ने मेरे दामन में

बिल्कुल ऐसे जैसे ज़हर भरा हो नागन में

उस को डर है उस का शौहर फ़ौत न हो जाए
उस की सारी चूड़ी टूट गई हैं अनबन में

उस के गीले गेसू, मछली के पर लगते थे
इक आज़ादाना मदहोशी थी, बंगालन में

उस की जौज़ा दीवानी है उस के बैरी की
या'नी इक बेवा रहती है उस की दुल्हन में

कैसे तन्हा देख सकोगी उल्टी दुनिया को
तुम को सब कुछ ठीक नज़र आता है दर्पन में

मेरा दिल गर मुझ
में धड़के पागल हो जाऊँ
एक अजब सा वहशी पन है मेरी धड़कन में

— Safar

More by Safar

Other ghazal from the same pen

See all from Safar →

Terrorism Shayari

Shers of terrorism.

All Terrorism Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling