किसी परी का लिबास, या फिर किसी नदी की मिठास होता
मेरा न फिर कुछ हिसाब होता, हिसाब से बे-हिरास होता
डरा नहीं आदमी ख़ुदास, तभी इबादत नशा नहीं है
क़यास तो है ख़ुदा मगर काश इन दिलों में हिरास होता
बचा रहूँ बस ख़ुदा तुझी से, बचा रहूँगा अबद-सरास
उमर-अबद जो मुझे मिले तो, शराब, ज़म-ज़म, गिलास होता
सफ़र तभी बुत-तराश बनता, वो देख लेता अगर ख़ुदा को
कभी ख़ुदास कलाम करता, कभी ख़ुदास उदास होता
Read Full