तेरी ये आँख भर जाए न मेरी लाश को छू कर

तू ख़्वाबों में भी डर जाए न मेरी लाश को छू कर

तुझे हर रात मारेगा जो मंज़र मौत पर होगा
तू ग़लती कोई कर जाए न मेरी लाश को छू कर

मिरे मरने पे तुझ से बस यही एक इल्तिजा होगी
तेरा साया गुज़र जाए न मेरी लाश को छू कर

इसी इक बात पर तो ख़ुद-कुशी करने से डरता हूँ
कहीं माँ मेरी मर जाए न मेरी लाश को छू कर

— sourabh meena

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