आज निकले हैं तिरे दीदार को
तू गिरा दे शर्म की दीवार को
वो अगर तस्वीर अपनी भेज दें
फ़ील मिलता फिर सही बीमार को
शहर जिस दिन मैं चला फिर ले लिया
मैं ने अपने साथ घर के प्यार को
याद हम को है अभी भी वो घड़ी
मैं ने छोड़ा था अना में चार को
फ़ोन नंबर और फ़ोटो सब दिया
ब्लॉक जाने क्यूँ किया फिर यार को
— Yashvardhan Mishra 'Hind'















