सितारे भी जान आप हैं माहताब भी आप ही हैं जानाँ

मिले शब-ओ-रोज़ मेरे दिल को वो ख़्वाब भी आप ही हैं जानाँ

ये आप हैं महज़ आप दिल के मिरे मोहल्ले में रहते हैं जो
फ़क़ीर भी जान आप हैं याँ नवाब भी आप ही हैं जानाँ

अगर मुझे पूछे कोई क्या कौन आप हैं मेरे तो कहूँगा
सुकून भी दिल का आप हैं इज़्तिराब भी आप ही हैं जानाँ

न आरज़ू मेरी दरिया है मेरी जुस्तजू भी नहीं है सहरा
तो प्यास भी दिल की आप हैं जानाँ आब भी आप ही हैं जानाँ

मैं प्यास का मारा हूँ पिलाओ ये आप हैं समझा कर के कुछ भी
मेरे लिए आप ही हैं अमृत शराब भी आप ही हैं जानाँ

— Deep kamal panecha

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Samundar Shayari

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