रख ली तुम सेे भी दोस्ती मैं ने

और फिर कर ली शा'इरी मैं ने

उस की बातें करो सभी मुझ से
देखनी फिर है बे-ख़ुदी मैं ने

वो मोहब्बत से बाज़ आए तो
उस को करना है अजनबी मैं ने

उस की बातें बता दी है तुम को
तुम से भी कर ली दुश्मनी मैं ने

आपसे बात कर के लगता है
आप की जी है ज़िंदगी मैं ने

वो अँधेरे से डरती रहती थी
घर जला कर दी रौशनी मैं ने

जब तेरे साथ दिल नहीं लगता
फिर तो करनी है ख़ुद-कुशी मैं ने

— Amanpreet singh

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