पाकर तुझ को तन्हा हूँ मैं
या'नी शे'र का मिसरा हूँ मैं
तुम मख़मल सी कोमल हो यार
कह दो पत्थर जैसा हूँ मैं
याद में तेरे बैठ अकेले
ग़ज़लें लिखता गाता हूँ मैं
तुम रानी हो महलों की तो
घर का राजा बेटा हूँ मैं
लौट गए वापस ग़म उस के
चंदन इतना तन्हा हूँ मैं
— Manoj Sharma "Chandan"















