महफ़िलो में मेरी तस्वीर दिखा दी तुम ने
बे-सबब ही यहाँ पे बात बढ़ा दी तुम ने
हम शिफ़ा के लिए दर पर तेरे आए थे मगर
रोज़ मरते है हमें ऐसी दवा दी तुम ने
मैं मोहब्बत करूँ इस बात पे या झगड़ा करूँ
सामने सबके ग़ज़ल मेरी सुना दी तुम ने
ये इरादा था तुम्हें दिल में बसाऊँ लेकिन
ईंट से ईंट मेरे दिल की बजा दी तुम ने
हद से ज़्यादा भी भरोसा है बुरी चीज़ 'आक़िब'
आज ये बात मुझे खूब सिखा दी तुम ने
— Mohammad Aquib Khan















