नधूपधूपरहेऔरनसायासायातो
जुनून-ए-शौक़अगरफिरवहींपेलायातो
क़दमबढ़ातोलूँआबादियोंकीसम्तमगर
मुझेवोढूँढतातन्हाइयोंमेंआयातो
सुलूकख़ुदसेहरीफ़ानाकौनचाहेगा
अगरचेतूनेमुझेज़िंदगीनिभायातो
मैंजिसकीओटमेंमौसमकीमारसहताहूँ
कहींखंडरभीवोबारिशनेअबकेढायातो
मगरगईनमहकमुझसेमेरेमाज़ीकी
नदीकीधारमेंसौबारमैंनहाएातो
शरीफ़लोगथेआदीथेबंदकमरोंके
लरज़उठेकिसीनेक़हक़हालगायातो
हैरस्म-ओ-राहकीसूरतअभीग़नीमतहै
नदीनेदेखमुझेहाथफिरहिलायातो