phir ek raat yoon hi guzar jaane ko hai | 'फिर एक रात यूँॅं ही गुज़र जाने को है'

  - Rehaan
'फिरएकरातयूँॅंहीगुज़रजानेकोहै'
फिरएकरातयूँॅंहीगुज़रजानेकोहै
ख़्वाबसारेटूटकरकहींसिफ़रजानेकोहैं
घोंसलावहम-ओ-गुमानकाफिरसेउजड़जानेकोहै
ज़ख़्मवोपुरानेफिरनिखरआनेकोहैं
साराजहाँमानोगहरीनींदमेंसोगयाहै
येमनमेराफिरउनहसींयादोंमेंखोगयाहै
क़लमजैसेफिरकोईनज़्मलिखनेकीज़िदपेअड़ीहै
शरीफ़दिलकीयेआदतआजभीबहुतबुरीहै
आँखोंसेनींदफिरगुमसीगईहै
सीनेमेंधड़कनजैसेथमसीगईहै
येचंचलहवाऍंयेगुमसुमघटाऍं
मुझेख़ुदसेकहींदूरलेजारहीहैं
वोसुनसानसड़केंवोवीरानगलियाँ
मुझेफिरसेअपनेपासबुलारहीहैं
हरेकपरवानेकोजैसेबसशमाकीतलाशहै
लहरोंकेमनमेंभीकोईअधूरीसीप्यासहै
सितारेअबचमकचमककरथकसेगएहैं
पत्तेभीपूरीतरहशबनमसेलिपटगएहैं
वक़्तजैसेरेतकीतरहफिसलरहाहै
चाँदतेजीसेफ़लककीओरबढ़रहाहै
येसुकून-ए-अँधेराफिरसेउतरजानेकोहै
येख़ूब-सूरतनज़ारेफिरसेबिखरजानेकोहैं
फिरएकरातयूँॅंहीगुज़रजानेकोहै
  - Rehaan
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Raat Shayari

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