वो लौटेंगे कभी वापस हमें इम्कान होता है
मगर फिर भी मियाँ इम्कान तो इम्कान होता है
ज़रा ठहरो ज़रा ठहरो, के पूरी नज़्म है बाकी
सुनो ऐ दोस्त पहला अश्क तो उनवान होता है
वो क़िस्सा जो चुराता है हमारे बीच से नज़रें
तुम्हें भी ध्यान होता है, हमें भी ध्यान होता है
मोहब्बत में कभी कुछ जल्दबाज़ी में नहीं होता
विसाल-ए-यार से पहले भी इत्मीनान होता है
हमें यूँ मुस्कुराता देख कर ऐ चौकने वालो
के सहराओं में भी तो यार नख्लिस्तान होता है
— Chandrajeet Regar















