अपना रखता ख़याल है कोई
तेरे जैसा निढाल है कोई
तेरा दावा है सच तो ज़िन्दा है
इस की ज़िन्दा मिसाल है कोई
ख़ुद ही करती है मौत से सौदा
ज़िन्दगी सा दलाल है कोई
आप आए हैं मेरे हुजरे पर
राज़ कुछ है कि चाल है कोई
ओढ़ लेता है चाहे जिस की जब
तेरी अपनी भी खाल है कोई
क़ामयाबी मिली है तुझ को जो
इस
में तेरा कमाल है कोई
पूछ लेता कभी नज़र से भी
उस का अपना सवाल है कोई
— Nazar Dwivedi















