मुफलिसी के मारे हम
जाएँ किस चौबारे हम
अपनी ख़ुशियाँ, जिम्मेदारी
पहले किसे सवारें हम
चादर न हो तो बतलाओ
कितना पाँव पसारे हम
दुनिया चाहे जो भी कह ले
माँ की आँख के तारे हम
मन मँझधार सा चंचल है
हैं ठहरे हुए किनारे हम
— Om Shukla
जाएँ किस चौबारे हम
अपनी ख़ुशियाँ, जिम्मेदारी
पहले किसे सवारें हम
चादर न हो तो बतलाओ
कितना पाँव पसारे हम
दुनिया चाहे जो भी कह ले
माँ की आँख के तारे हम
मन मँझधार सा चंचल है
हैं ठहरे हुए किनारे हम
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