tujh se bichhde bhi to haalaat ne rone na diya | तुझ से बिछड़े भी तो हालात ने रोने न दिया

  - G R Kanwal

तुझ से बिछड़े भी तो हालात ने रोने न दिया
दिल-शिकन वक़्त के लम्हात ने रोने न दिया

दिन को फ़ुर्सत न मिली अश्क बहाने की कभी
रात आई तो मुझे रात ने रोने न दिया

उस की आँखें भी रहीं ख़ुश्क हमेशा की तरह
मुझ को भी आज किसी बात ने रोने न दिया

अश्क मायूस सवाली की तरह लौट गए
वो मिला भी तो मुलाक़ात ने रोने न दिया

उन के हिस्से का 'कँवल' शहर में तुम ही रो लो
जिन को मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया

  - G R Kanwal

Charagh Shayari

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