वो सितमगर जिधर गया होगा
इक ज़माना उधर गया होगा
आने वाला ज़मीं पे आता था
जाने वाला किधर गया होगा
गाहे-गाहे तो ख़ुद समुंदर भी
अपनी लहरों से डर गया होगा
चारा-गर बे-सबब नहीं रोता
कोई बीमार मर गया होगा
जिस पे ग़म की नज़र पड़ी होगी
उस का चेहरा निखर गया होगा
दिल जो बिगड़ा हुआ था मुद्दत से
चोट खा कर सँवर गया होगा
मेरा दुश्मन 'कँवल' पस-ए-पर्दा
जो भी करना था कर गया होगा
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