jabr ne jab mujhe rusva sar-e-bazaar kiya | जब्र ने जब मुझे रुस्वा सर-ए-बाज़ार किया

  - Jabbar Wasif
जब्रनेजबमुझेरुस्वासर-ए-बाज़ारकिया
सब्रनेमेरेमुझेसाहब-ए-दस्तारकिया
मेरीलफ़्ज़ोंकीइमारतगिरीकामआईमिरे
मेरीग़ज़लोंनेमिरेनामकोमीनारकिया
अपनेहाथोंमेंकुदूरतकीकुदालेंलेकर
मेरेअपनोंनेमिरीज़ातकोमिस्मारकिया
यादजबआयाकोईवा'दा-ए-ता'मीरमुझे
मैंनेतबजिस्मकीहरपोरकोमें'मारकिया
औरफिरसब्ज़इशाराहुआउसपारसेजब
मैंनेइकजस्तमेंदरिया-ए-बलापारकिया
आजफिरख़ाकबहुतरोईलिपटकरमुझसे
आजफिरक़ब्रनेबाबाकीमुझेप्यारकिया
चाँदनेरातमिरेसाथमिरेदुखबाँटे
सुब्हसूरजनेभीगिर्यासर-ए-दीवारकिया
आगअश्जारकोलगनेसेकईदिनपहले
मैंनेरोरोकेपरिंदोंकोख़बर-दारकिया
ऐसामातमकभीदरियाकादेखासुना
जानेकिसप्यासनेपानीकोअज़ा-दारकिया
जबहवादेनेलगीठंडेदिलासेमुझको
कुछचराग़ोंनेभीअफ़्सोसकाइज़हारकिया
देखकरजलतीहुईझोंपड़ीकलशब'वासिफ़'
मैंनेसोएहुएदरवेशकोबेदारकिया
  - Jabbar Wasif
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Kashmir Shayari

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