jo nabaataat-o-jamaadaat pe shak karte hain | जो नबातात-ओ-जमादात पे शक करते हैं

  - Jabbar Wasif
जोनबातात-ओ-जमादातपेशककरतेहैं
ख़ुदातेरेकमालातपेशककरतेहैं
वोजोकहतेहैंधमाकेसेजहाँख़ल्क़हुआ
दर-हक़ीक़तवोसमावातपेशककरतेहैं
मैंभीबचपनमेंतफ़क्कुरपेयक़ींरखताथा
मेरेबच्चेभीरिवायातपेशककरतेहैं
मैंइसीशहरमेंआँसूलिएफिरताहूँजहाँ
पेड़चिड़ियोंकीमुनाजातपेशककरतेहैं
अपनेहिस्सेमेंवोबे-फ़ैज़सदीहैजिसमें
लोगवलियोंकीकरामातपेशककरतेहैं
इसलिएहमपेगुज़रतीहैक़यामतहरदिन
हमक़यामतकीअलामातपेशककरतेहैं
आपकेखेतमेंउगतीहैसुनहरीगंदुम
आपक्यूँउसकीइनायातपेशककरतेहैं
जिनकोमूसाकापताहैख़बरतूरकीहै
ऐसेबद-बख़्तभीतौरातपेशककरतेहैं
इश्क़कीऐनकातोदश्तमेंमदफ़नहीनहीं
आशिक़ाँयूँँहीख़राबातपेशककरतेहैं
आपझरनोंकीतिलावतकोनहींसुनसकते
आपफ़ितरतकेइशारातपेशककरतेहैं
सिर्फ़शाइ'रहीनहींहूँमैंमुसलमानभीहूँ
आपक्यूँमेरीइबादातपेशककरतेहैं
आपकोचाहिएसुक़रातकेबारेमेंपढ़ें
आप'वासिफ़'केख़यालातपेशककरतेहैं
  - Jabbar Wasif
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Shajar Shayari

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