अपने ग़म में उदास हम ही थे
कौन था अपने पास हम ही थे
कौन दिल का क़रार था जानाँ
कौन था तुझ को रास हम ही थे
कौन पुर-नम रहा तिरी ख़ातिर
साल के बारह-मास हम ही थे
अब जो हैं दूर-दूर हम ही हैं
वो जो थे पास-पास हम ही थे
हाए ज़ाहिर पे मर गए थे जो
ऐसे आदम-शनास हम ही थे
— Meem Maroof Ashraf















