इस दिल को तुम्हारी आदत है
ये आदत बेशक ईनत है
तुम से ही तो जाना हम ने
हम पे अल्लाह कि रहमत है
इक यार फ़रेबी को साहिब
दुनिया मिटने की दहशत है
पलपल में मिरा हसना रोना
ज़ाहिद ये ख़ुदा की नेमत है
मैकश पे ये कैसा ज़ुल्म ख़ुदा
हर पैमाने में शर्बत है
है तेग़ मिरी गर्दन पे मिरे
किस मुँह से कहूँ क्या हसरत है
दुश्मन भी है भाई अपना
ऐसा कहता ये भारत है
— Raushan miyaa'n















