तभी से चाँद फ़लक पे रौशन हुआ होगा

उसी ने चाँद को हाथों से जब छुआ होगा

उजाड़ कर दुनिया ख्वाहिशों की वो मेरे
नहीं है लगता कि सच में ख़ुश हुआ होगा

भले न हो सके तुम जो मेरे तो मत समझो
दुआ के बदले मेरे लब पे बद्'दुआ होगा

मेरी कोई भी वो मन्नत कभी नहीं सुनता
लगे कि रब मुझी पे ही सिर्फ़ ख़फा होगा

विधान ये विधी का है या साज़िश कोई
न था यक़ीं कि तू भी मुझ से यूँ जुदा होगा

— Vedic Dwivedi

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Aarzoo Shayari

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