चाहिए क्या और आफ़त के लिए

इश्क़ काफ़ी है क़यामत के लिए

जान कर कुछ ग़लतियाँ करता था मैं
दिल तरसता था शिकायत के लिए

इश्क़ तेरा बन गया है वो मिसाल
लोग देंगे जिस को लानत के लिए

हम ने उस से भी मुहब्बत कर ली है
जो न क़ाबिल था अदावत के लिए

ख़ुश-मिज़ाजी को तिरे समझा था इश्क़
माफ़ कर दे इस हिमाक़त के लिए

मौत भी है हिज्र जैसी कैफ़ियत
क्या सज़ा दें फिर बग़ावत के लिए

— Yamir Ahsan

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