
कब कहाँ कैसे हर इक पा के ख़बर मरते थे
उस ज़माने में कुछ इस तरह हुनर मरते थे
वैसे तो था नहीं कोई भी तअल्लुक़ हम
में
देख इक दूसरे को एक नज़र मरते थे
— Ayush Aavart
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