apne pairo'n men muhabbat ka asar baandh ke ham | अपने पैरों में, 'मुहब्बत का 'असर बाँध के हम

  - KARAN
अपनेपैरोंमें,'मुहब्बतका'असरबाँधकेहम
घरसेनिकलेंगे,'सर-ए-शाम'कमरबाँधकेहम
कितनीहीसख़्तियाँ,'पेशआएँमगरआएँगे
आपकीसम्तअब'एहराम-ए-सफ़रबाँधकेहम
जिसकीनज़रोंके,'मुक़ल्लिद'रहेहैंहमबरसों
छोड़आएउसी'साहिरकी,'नज़रबाँध'केहम
हमने'वीरानजोदेखीं,तोतेरीआँखोंमें
गए,कितनेहसीं'ख़्वाब-नगर'बाँधकेहम
गरकहींआपकोमिलजाएँ,ख़बरकरदेना
जानेरखआएभलाख़ुदकोकिधरबाँधकेहम
ख़ैर''उम्मीद-ए-मुहब्बत"थी,मगरलौटआए
आपके'शहरसदामनमें,'शररबाँधकेहम
छोड़कर'आलम-ए-फ़ानीतोहैजाना'बर-हक़
साथलेजाएँगेसब'ऐबो-हुनरबाँधकेहम
हाए!कटतीहीनहीं,''हिज्रकीतन्हारातें
वस्लकी'काशकिलापाते,''सहरबाँधकेहम
डूबजानेसेतोबेहतरथा,सफ़ीना-ए-दिल
साथलेआएँकिनारेपे,'भँवरबाँधकेहम
तीरगीहमकोकरन,भानेलगीहैयकसर
चल!छुपादेतेहैं,ये'शम्सो-क़मर'बाँधकेहम
  - KARAN
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Kashti Shayari

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