वैसे तुम्हारे वास्ते ज़्यादा नहीं किया

बस उम्र भर किसी को भी अपना नहीं किया

हम आज तलक सुन रहें हैं ता'ने लोगों के
लेकिन तुम्हें कभी कहीं रुस्वा नहीं किया

ना दोस्ती न इश्क़ न ही क़त्ल कर सके
तुम ने तो कोई काम भी पूरा नहीं किया

ये मानते है हम के फ़रेबी बहुत हैं पर
हम ने ज़मीर का कभी सौदा नहीं किया

पूछा जो हम ने उस से तो बोला वो इश्क़ है
हाँ उस ने मगर इश्क़ का वा'दा नहीं किया

जो जा रहा था उस को ख़ुशी से किया विदा
हम ने किसी की कार का पीछा नहीं किया

मैं ख़ुद ही देखूँ सारे सितम उस ने इस लिए
बेजान कर दिया मगर अंधा नहीं किया

हम ने बुरे को बोला बुरा पिछली सफ से भी
अगली सफों में बैठ के मुजरा नहीं किया

— Mohammad Aquib Khan

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