naahak o haq ka unhen khauf-o-khatr kuchh bhi nahin | नाहक़ ओ हक़ का उन्हें ख़ौफ़-ओ-ख़तर कुछ भी नहीं

  - Agha Hajju Sharaf
नाहक़हक़काउन्हेंख़ौफ़-ओ-ख़तरकुछभीनहीं
बे-ख़बरहैंवोज़मानेकीख़बरकुछभीनहीं
धूमहीधूमथीमदफ़नकीमगरकुछभीनहीं
ख़ाकइसघरमेंबसरहोगीयेघरकुछभीनहीं
हाएअफ़सोसहुईकौनसीसोहबतबरख़ास्त
शबकोमे'राजमेंथेवक़्त-ए-सहरकुछभीनहीं
कहरहीहैयेमरेदिलसेमोहब्बतउसकी
हूँतोइक्सीरमगरमुझमेंअसरकुछभीनहीं
रहीहैयेसदागोरकेसन्नाटेसे
मैंवोआलमहूँजहाँशाम-ओ-सहरकुछभीनहीं
इसनज़ाकतसेतोमैंकाहेकोबिस्मिलहूँगा
तुमछुरीफेरतेहोमुझकोख़बरकुछभीनहीं
हातिफ़-ए-इश्क़तोकहताहैइधरसबकुछहै
आलम-ए-यासयेकहताहैउधरकुछभीनहीं
आँखफिरजातीहैमाशूक़ोंकीमायूसोंसे
ग़म-ज़दाकुछनहींहसरतकीनज़रकुछभीनहीं
तुर्बत-ए-क़ैससेकहतीहैलिपटकरलैला
हमतड़पतेहैंपड़ेतुमकोख़बरकुछभीनहीं
मंज़िल-ए-गोरमेंक्याजानिएक्यागुज़रेगी
ताज़ावारिदहैंअभीहमकोख़बरकुछभीनहीं
लन-तरानीकीजोताकीदहैदिलयेखुला
बाब-ए-दीदारमेंमंज़ूर-ए-नज़रकुछभीनहीं
ख़्वाबदेखाथाकिथावस्लकीशबकासामान
जश्नथारातकोहंगाम-ए-सहरकुछभीनहीं
उसकोगहरीइसेयेओछीछुरीवाहयार
ज़ख़्म-ए-दिलघावहुआज़ख़्म-ए-जिगरकुछभीनहीं
रिश्ता-ए-जाँसेभीनाज़ुकहैवोबारीकीमें
गुलकीरगफिरहैगुदाज़उसकीकमरकुछभीनहीं
क़ब्रमेंहूरोंकेआनेकाउठाएँक्यालुत्फ़
दीदाजिस्मदिलजानजिगरकुछभीनहीं
रासजाएगीजिसकोवोउसेचाहेंगे
फिरमोहब्बतमेंसभीकुछहैअगरकुछभीनहीं
मुतमइनहूँरह-ए-इस्याँमेंतिरीरहमतसे
वोमुसाफ़िरहूँकितशवीश-ए-सफ़रकुछभीनहीं
'शरफ़'हैगुल-ए-मक़सूदकेहर-सूबौछार
वाहख़ूबी-ए-क़िस्मतकिइधरकुछभीनहीं
  - Agha Hajju Sharaf
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