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ये इंक़लाब हुआ जाने रूनुमा कैसे  - Aish Meeruthi

ये इंक़लाब हुआ जाने रूनुमा कैसे
बदल गए तिरी महफ़िल में आश्ना कैसे

तुम्हारी बज़्म में आख़िर मैं लुट गया कैसे
ये सानेहा तो हुआ है मगर हुआ कैसे

ज़रा ये देख कि मेरे सुजूद-ए-पैहम से
मिटा तो नक़्श-ए-कफ़-ए-पा मगर मिटा कैसे

वफ़ा का ग़ैर की भी इम्तिहान हो जाए
हमारे होते हुए उस ने ये कहा कैसे

उठाने वाले हमें बज़्म से ज़रा ये देख
कि टूटता है ग़रीबों का आसरा कैसे

मैं कोई क़तरा-ए-शबनम था ताबिश-ए-रुख़ से
वजूद-ए-हर्फ़-ए-ग़लत की तरह मिटा कैसे

है 'ऐश' साथ कोई राहबर न हमराही
कटेगी देखिए तन्हा रह-ए-वफ़ा कैसे

- Aish Meeruthi

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