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न पूछ दोस्त की कितना ख़राब होता है  - Dipak Prajapati Khaalis

न पूछ दोस्त की कितना ख़राब होता है
बस इतना जान ज़माना ख़राब होता है

ये इश्क़ है न जो ये दिल की इक ख़राबी है
ख़राबियों का नतीजा ख़राब होता है

अजब मिज़ाज की दुनिया है ये कि इस के लिए
ख़राब अच्छा तो अच्छा ख़राब होता है

हुज़ूर छोड़िए ये अम्न-ओ-वम्न की बातें
सियासी लोगों का धंदा ख़राब होता है

कोई किसी भी समय झट से तोड़ सकता है
उमीद सब से लगाना ख़राब होता है

शराब पैसा अना ख़्वाब इश्क़ या कि सुख़न
किसी भी शय का हो नश्शा ख़राब होता है

उदास मत हो मियाँ है ये इम्तिहान-ए-ज़ीस्त
इस इम्तिहान में परचा ख़राब होता है

Dipak Prajapati Khaalis
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