मैं तो यूँँ ही निहाल था क्या था
सारा रब का कमाल था क्या था
बेच देता न अज़्म अपना मैं
रोटियों का सवाल था क्या था
यक-ब-यक आ गई मुझे हिचकी
एक तेरा ख़याल था क्या था
इतनी नफ़रत नहीं थी लोगों में
इक सियासी बवाल था क्या था
एक तू ही नहीं था गर्दिश में
मैं भी तो तंग हाल था क्या था
उस पे होना ही था फ़िदा मुझ को
उस
में इतना जमाल था क्या था
ग़म के इतने हुजूम थे मुझ में
मुस्कुराना मुहाल था क्या था
— Nazar Dwivedi















