nad | नद्दी नद्दी रन पड़ते हैं जब से नाव उतारी है

  - Ezaz Afzal
नद्दीनद्दीरनपड़तेहैंजबसेनावउतारीहै
तूफ़ानोंकेकस-बलदेखेअबमल्लाहकीबारीहै
नींदरगोंमेंदौड़रहीहैपोरपोरबेदारीहै
जिस्मबहुतहस्सासहैलेकिनदिलजज़्बातसेआरीहै
आवाज़ोंकेपैकरज़ख़्मीलफ़्ज़ोंकेबुतलहू-लुहान
करतेहैंइज़हार-ए-तफ़न्नुनकहतेहैंफ़नकारीहै
मंज़िलमंज़िलपाँवजमाकरहमभीचलेथेहम-सफ़रो
उखड़ीउखड़ीचालकाबाइ'सेराहकीना-हमवारीहै
आँखथकननेखोलीहैयाअज़्म-ए-सफ़रनेकरवटली
परफैलाकरबैठोगेयाउड़नेकीतय्यारीहै
सचकहतेहोनीवमेंइसकीटेढ़ीकोईईंटनहीं
आड़ी-तिरछीछतकाबाइ'सेघरकीकज-दीवारीहै
क्याकहिएक्यूँँआजसरोंसेज़ख़्मोंकाबोझउठसका
पत्थरथेलेकिनहल्केथेफूलहैलेकिनभारीहै
बस्तीबस्तीक़र्याक़र्याकोसोंआँगनहैमुंडेर
ज़ेहनख़राबादिलवीरानाघरआ'साबपेतारीहै
एकदियाऔरइतनारौशनजैसेदहकतासूरजहो
कहनेवालेसचकहतेहैंरातबहुतअँधियारीहै
  - Ezaz Afzal
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Nigaah Shayari

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