नए अंदाज़ से दीदार कर लूँ फिर चले जाना
मैं अपनी रूह को बेदार कर लूँ फिर चले जाना
हज़ारों ख़्वाब देखे थे मिरी मासूम आँखों ने
मैं उन का सरसरी इज़हार कर लूँ फिर चले जाना
हवस ने आज तक जो ऐश के पैकर बनाए हैं
उन्हें पूरी तरह मिस्मार कर लूँ फिर चले जाना
तुम्हारी दीद के जो मुंतज़िर थे एक मुद्दत से
मुज़य्यन वो दर-ओ-दीवार कर लूँ फिर चले जाना
वो जिन को थाम कर तुम ने मुझे जुम्बिश अता की थी
मैं इन हाथों से तुम को प्यार कर लूँ फिर चले जाना
वो जिस पर ठोकरें खा कर 'कँवल' से मिलने आए हो
वो रस्ता शौक़ का हमवार कर लूँ फिर चले जाना
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