naye andaaz se deedaar kar luun phir chale jaana | नए अंदाज़ से दीदार कर लूँ फिर चले जाना

  - G R Kanwal

नए अंदाज़ से दीदार कर लूँ फिर चले जाना
मैं अपनी रूह को बेदार कर लूँ फिर चले जाना

हज़ारों ख़्वाब देखे थे मिरी मासूम आँखों ने
मैं उन का सरसरी इज़हार कर लूँ फिर चले जाना

हवस ने आज तक जो ऐश के पैकर बनाए हैं
उन्हें पूरी तरह मिस्मार कर लूँ फिर चले जाना

तुम्हारी दीद के जो मुंतज़िर थे एक मुद्दत से
मुज़य्यन वो दर-ओ-दीवार कर लूँ फिर चले जाना

वो जिन को थाम कर तुम ने मुझे जुम्बिश अता की थी
मैं इन हाथों से तुम को प्यार कर लूँ फिर चले जाना

वो जिस पर ठोकरें खा कर 'कँवल' से मिलने आए हो
वो रस्ता शौक़ का हमवार कर लूँ फिर चले जाना

  - G R Kanwal

Haalaat Shayari

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