तुम को खो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
दूर हो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
दर्द कम होता है रो लेने से गर
फिर क्यूँ रो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
ऐसे कुछ काम भी थे ज़िन्दगी में
यार जो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
इश्क़ ऐसा गुनाह है जिस का
पाप धो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
क्यूँ झिझक हो हमें ये कहने में
तेरे होकर के ख़ुश नहीं हैं हम
हाए इक मुस्कुराते चेहरे में
ग़म पिरो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
तेरे दरिया-ए-इश्क़ में अपना
दिल डुबो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
यार तेरे बिना जवानी का
बोझ ढो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
इक ख़ुशी के गुबारे में अपना
ग़म चुभो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
जान-ए-जाँ अब फ़िराक़ में तेरी
शब भिगो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
किस से शिकवा करें कि क्यूँ ख़ुद को
इक से दो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
माँग में तेरी अपने सपनों का
खू़ँ सँजो कर के ख़ुश नहीं है हम
डूबने वाले जानते ही नहीं
लाश ढो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
दुनिया वालों तुम्हारी दुनिया में
साँसे ढो कर के ख़ुश नहीं हैं हम
इस मुहब्बत के दश्त में "कातिब"
ज़हर बो कर के ख़ुश नहीं हैं हम















