तेरे बिना नदी का किनारा है और मैं
सूरज के डूबने का नज़ारा है और मैं
मुश्किल घड़ी में साथ निभाता नहीं कोई
परवरदिगार तेरा सहारा है और मैं
उलझा हुआ है आज अजब कश्मकश में दिल
मेरी तरफ़ किसी का इशारा है और मैं
दिल में तुम्हारे कौन है मुझ को बताओ तो
इक अजनबी सा शख़्स तुम्हारा है और मैं
दिल जब से मेरा तोड़ के वो संग दिल गया
आँखों में मेरी अश्कों की धारा है और मैं
फिर मेरा साथ छोड़ गया मेरा हम सफ़र
गर्दिश में आज मेरा सितारा है और मैं
मुझ को ही मिल सकी न वो मेरे रक़ीब को
इक फ़ैज़ वो नसीब का मारा है और मैं
— Dard Faiz Khan















