ज़माना भला या बुरा जानता है
मुझे कौन तेरे सिवा जानता है
अगरचे तू वाली, ख़ुदा नाम तेरा
बता मेरे बारे तू क्या जानता है
ज़रा सा तो दिल है मगर बोझ कितना
मेरा हाल अब बस ख़ुदा जानता है
इसी शाम कुछ इम्तिहाँ और होंगे
ख़ता बस है इतनी वफ़ा जानता है
यहाँ सैकड़ो से जुदा है तू तालिब
मुहब्बत को अब भी सज़ा जानता है
— Mohammad Talib Ansari















