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आप को मुझ से मोहब्बत कैसी  - Dr. Mohammad Jamal

आप को मुझ से मोहब्बत कैसी
और अगर है तो शिकायत कैसी

हाए सड़कों पे ये नंगे बच्चे
मुल्क ख़ुश-हाल तो ग़ुर्बत कैसी

अपने ज़ाहिद से कोई पूछे तो
ये रिया-कार इबादत कैसी

छेड़ने का तो नहीं हूँ आदी
मेरे किरदार पे हैरत कैसी

बे-इरादा मिरे घर आइएगा
मैं न पूछूँगा ये फ़ुर्सत कैसी

अपने शैदाई पे ये ज़ुल्म-ओ-सितम
जान-ए-जाँ आप की आदत कैसी

मैं हूँ बे-नाम सा आवारा सा
आप की मुझ पे इनायत कैसी

कुफ़्र-ओ-इल्हाद से टकराते हो
ऐ 'जमाल' आप की हिम्मत कैसी

सब को ना-क़दरी-ए-फ़न का है गिला
ऐ 'जमाल' आप की हुरमत कैसी

Dr. Mohammad Jamal
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