gul-e-veeraana hooñ koi nahin hai qadr-daan meraa | गुल-ए-वीराना हूँ कोई नहीं है क़द्र-दाँ मेरा

  - Jagat Mohan Lal Ravan
गुल-ए-वीरानाहूँकोईनहींहैक़द्र-दाँमेरा
तूहीदेखमिरेख़ल्लाक़हुस्न-ए-राएगाँमेरा
येकहकररूहनिकलीहैतन-ए-आशिक़सेफ़ुर्क़तमें
मुझेउजलतहैबढ़जाएआगेकारवाँमेरा
हवाउसकोउड़ालेजाएअबयाफूँकदेबिजली
हिफ़ाज़तकरनहींसकतामिरीजबआशियाँमेरा
ज़मींपरबारहूँऔरआसमानसेदूरमालिक
नहींमालूमकुछआख़िरठिकानाहैकहाँमेरा
मुझेनग़्मेंकालुत्फ़आताहैरातोंकीख़मोशीमें
दिल-ए-बशिकस्ताहैइकसाज़-ए-आहंगफ़ुग़ाँमेरा
वहींसेइब्तिदा-ए-कूचा-ए-दिलदारकीहदहै
क़दमख़ुदचलतेचलतेकेरुकजाएजहाँमेरा
ज़रादूरऔरहैकश्ती-ए-उम्र-ए-रवाँसाहिल
किइसबहर-ए-जहाँमेंहरनफ़सहैबादबाँमेरा
हुईजातीहैतन्हाईमेंलज़्ज़तरूहकीज़ाएअ'
लुटाजाताहैवीरानेमेंगंज-ए-शाएगाँमेरा
अनासिरहँसतेहैंदुनियाकीवुसअ'तमुस्कुरातीहै
किसीसेपूछतेहैंअहल-ए-बीनशजबनिशाँमेरा
मिरेबा'दऔरफिरकोईनज़रमुझसानहींआता
बहुतदिनतकरक्खेंगेसोगअहल-ए-ख़ानदाँमेरा
ग़नीमतहैनफ़सदोचारजोबाक़ीहैंअबवर्ना
कभीकालुटचुकासरमाया-ए-सोद-ओ-ज़ियाँमेरा
अभीतकफ़स्ल-ए-गुलमेंइकसदा-ए-दर्दआतीहै
वहाँकीख़ाकसेपहलेजहाँथाआशियाँमेरा
'रवाँ'सचहैमोहब्बतकाअसरज़ाएअ'नहींहोता
वोरोदेतेहैंअबभीज़िक्रआताहैजहाँमेरा
  - Jagat Mohan Lal Ravan
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Mohabbat Shayari

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