रब-ए-कायनात

दस्त-ए-करम बढा मिरी जानिब मिरे ख़ुदा
खादिम ये दस्त-बस्ता खडा हैं दयार पर
मैं ने मुनाफिकों के हैं लश्कर गिरा दिए
तेरा गुलाब तन्हा हैं ग़ालिब हज़ार पर
मेरी तरफ़ निगाह क' ऐ रब-ए-कायनात
बैठा हूँ ग़म ज़दा मैं ही अपने मज़ार पर
ऐ रब-ए-कायनात तू यकता हैं जिस तरह
मुझ को भी उस तरह से अकेला बना दिया
ऐ रब-ए-कायनात मुझे ख़त नहीं मिला
ऐ रब-ए-कायनात कबूतर को भेज दे
ऐ रब-ए-कायनात ये जंगल तवील हैं
रस्ता दिखाने मील के पत्थर को भेज दे
ऐ रब-ए-कायनात मुहब्बत शनास हूँ
मैं मुन्तज़िर हूँ तू मिरे दिल-बर को भेज दे
ऐ रब-ए-कायनात ये तिशना लबी तो देख
होंठों को मेरे जाम ए कौसर नसीब कर
ऐ रब-ए-कायनात मिरी बात सुन ज़रा
दुनिया में नफरतों के हैं शो'ले भड़क रहे
ऐ रब-ए-कायनात तअस्सुब को ख़त्म कर
हम को तिरी जबीन से दुगना लगाव हैं
ऐ रब-ए-कायनात हमारी नज़र को देख
आँसू भी आबशार की मानिंद बह गए
ऐ रब-ए-कायनात शिकायत करे किसे
तेरे सिवा किसी को हमारी नहीं पड़ी
ऐ रब-ए-कायनात वबा का इलाज कर
इंसान थक गया हैं अबाबील भेज दे
ऐ रब-ए-कायनात बचा ऐसी मोत से
कोई क़फ़त नहीं हैं ज़नाज़े उठाए कौन
ऐ रब-ए-कायनात हमारी दुआ को सुन
अब तो मिरी ज़बान से छाले निकल गए
ऐ रब-ए-कायनात हमारा नहीं कोई
इक तेरे आसरे प' जिए जा रहे हैं हम
ऐ रब-ए-कायनात हमें इश्क़ खा गया
तस्वीर तेरी याद की दीमग निगल गई
मैसेज हम ने फ़ोन से सारे मिटा दिए
जो ख़त बचे थे पास
में सारे जला दिए
यादों से तेरी पीछा छुड़ाने मैं लगा हूँ
ऐ रब-ए-कायनात मुझे कोई हल बता
या फिर यही हैं ठीक ज़हर कर हमें अता
ऐ रब-ए-कायनात ज़हर हैं हवाओं में
ऐ रब-ए-कायनात हवाओं को साफ कर
मैं हाथ जोड़ता हूँ गुनाहों को माफ कर

— Moin Hasan

More by Moin Hasan

Other nazm from the same pen

See all from Moin Hasan →

Udas Shayari

Shers of udas.

All Udas Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling