दूर ख़ुद से किया नहीं जाता
पास जिस के रहा नहीं जाता
मेरी आँखों में गर्द है मुझ से
उस का चेहरा पढ़ा नहीं जाता
मैं ग़मों में निढाल बैठा हूँ
इस से ज़्यादा सहा नहीं जाता
हाल फ़िलहाल क्या कहूँ तुम से
सच कहूँ कुछ कहा नहीं जाता
एक दिल ही तो महज़ माँगा था
तुम से वो भी दिया नहीं जाता
— Furkan Ansari















