इक प्यारी सी गुड़िया ने अपनाया है
तब ये दिल सद
में से बाहर आया है
दोनों हैं औ बारिश का मौसम भी है
उस पर ये दीवाना छाता लाया है
जब से उस ने आँखें मेरी चूमी हैं
तब से ये काला चश्मा चढ़वाया है
आँखें सूखी जाती थीं ग़म ऐसा था
हम ने इनको अश्कों से नहलाया है
उस के जाने का दुख हम पर यूँ बरपा
दिल को झूठे ख़्वाबों पर धड़काया है
इस दुनिया में दुनिया वो ही जीतेगा
जिस ने जितना अच्छा धोखा खाया है
— Vishal Rana















