जब कोई हम-कलाम होता हैपहले मेरा सलाम होता हैहो कोई छोटा या बड़ा मुझ सेमुझ से पर एहतिराम होता हैउस को फ़ुर्सत नहीं है मिलने कीमुझ को भी रोज़ काम होता हैकौन करता है काम मर्ज़ी सेपेट का इंतिज़ाम होता हैमेरी हसरत की रह गई हसरतक्योंकि हसरत का दाम होता है— Aktar ali