लगताहैऐसाजैसेपानीसेनारगुज़रे
चट्टानचीरकरजबभीआबशारगुज़रे
इंसानकुछसलीक़ेबचपनमेंसीखलेगर
क्यूँँज़िंदगीनउसकीफिरशानदारगुज़रे
बदलेख़िज़ाँकामौसमआएक़रारकुछतो
एकाशमेरेदरसेकोईबहारगुज़रे
आएथेपाकदामनपीर-ए-मुगाँकेदरपर
लेकिनयहाँसेहोकरहमदाग़दारगुज़रे
क़तरानहोसकाइकप्यासीज़मींकोहासिल
सहरासेयूँँतोबादलकितनीहीबारगुज़रे
हरआँखरोरहीथीहरदिलसिसकरहाथा
काँधोंपेमुझकोलेकरजबमेरेयारगुज़रे
महबूबकीगलीकेदस्तूरकेमुताबिक़
सरकोझुकाएमीनासबताजदारगुज़रे