सिफ़ारिशों के बजाए हुनर से जाना गया

परिंदा पेड़ नहीं बाल-ओ-पर से जाना गया

किसी का होना किसी की नज़र से जाना गया
मिरा मकान तिरी रहगुज़र से जाना गया

मुझे मिलाया था इक रोज़ तुम ने मिट्टी में
नतीजा ये हुआ मैं फिर शजर से जाना गया

जहाँ पे बोलते रहना दलील इल्म की थी
वहाँ मैं गुफ़्तुगू-ए-मुख़्तसर से जाना गया

मैं इस किताब के इक बाब का हूँ इक किरदार
वो जिस किताब को केवल कवर से जाना गया

वगर्ना इश्क़ की गलियाँ तवील होती हैं
मिरा नसीब मैं पहले ही घर से जाना गया

अदब में 'मीर' का क़श्क़ा ही थोड़ी है मशहूर
हमारा सर भी तिरी ख़ाक-ए-दर से जाना गया

मैं तन्हा करता रहा मुद्दतों ग़ज़ल का सफ़र
और आख़िरश ये सफ़र हम-सफ़र से जाना गया

— Ahmad Azeem

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