कोई दर्द नहीं, कोई दुआ भी नहींपत्थरों को कभी कुछ हुआ भी नहींसज़ा हो गई उस को ता'उम्र क़ैद कीवो फ़रियादी जिस की ख़ता भी नहींहम को देखना आ कर, तुम्हें मालूम होगातुम से क़त्ल हो गया है, तुम्हें पता भी नहीं— Sushrut Tiwari